मंत्रोच्चार के घोष में त्र्यंबकेश्वर में विधिवत ध्वजस्तंभ पूजन

मंत्रोच्चार के घोष में त्र्यंबकेश्वर में विधिवत ध्वजस्तंभ पूजन

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नाशिक – आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के परिप्रेक्ष्य में त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर आज सुबह धार्मिक विधि और मंत्रोच्चार के घोष के बीच राज्य के जलसंपदा मंत्री तथा नाशिक जिले के पालकमंत्री गिरीश महाजन के हाथों ध्वजस्तंभ पूजन किया गया।

सिंहस्थ कुंभ मेले के संबंध में त्र्यंबकेश्वर में श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रभावी प्रबंधन, विभिन्न कार्यों का सूक्ष्म नियोजन और विकास कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है। राष्ट्रपति महोदय के प्रस्तावित दौरे के परिप्रेक्ष्य में भी संबंधित तंत्रों ने आवश्यक तैयारी समय पर पूरी करनी चाहिए, ऐसा प्रतिपादन पालकमंत्री गिरीश महाजन ने इस अवसर पर किया।

सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ, श्रद्धालुओं की सुविधाएँ, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय ये बातें महत्वपूर्ण हैं। सभी संबंधित तंत्रों ने परस्पर समन्वय से काम कर योजना के अनुसार कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया। इस पूजन समारोह में विधायक हिरामण खोसकर, नगराध्यक्षा त्रिवेणी तुंगार, उपनगराध्यक्षा पल्लवी शिरसाट, सार्वजनिक निर्माण विभाग की मुख्य अभियंता अरुंधती शर्मा, पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. एस. स्वामी, सहायक धर्मादाय आयुक्त विवेक सोनुने, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षक अभियंता देवेंद्र पवार, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण के अतिरिक्त आयुक्त कमलाकर रणदिवे, निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत, उपविभागीय अधिकारी डॉ. पवन दत्ता, तहसीलदार गणेश जाधव, मुख्याधिकारी गोविंद जाधव, त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे, नाशिक पुरोहित संघ के सतीश शुक्ल सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख, साधु, संत, महंत, श्रद्धालु और ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का संगम रहे इस समारोह के माध्यम से सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारी के संबंध में त्र्यंबकेश्वर की योजना को महत्व प्राप्त हुआ है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों ने समन्वय से कार्यवाही करने की आवश्यकता इस अवसर पर रेखांकित की गई।

ऐसा है ध्वजस्तंभ

ध्वजस्तंभ की ऊँचाई 31 फीट है। ध्वजस्तंभ पर समुद्र मंथन की संकल्पना साकार की गई है। मंथन से प्राप्त रत्न ध्वज पर हैं। निचले भाग में श्री गणेश की प्रतिमा साकार की गई है। सबसे ऊपरी भाग में अमृत कलशधारी गरुड़ की प्रतिमा है।

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